Sunday, May 10, 2009

चाहे जितनी मंदी हो, घर और शराब तो चाहिए...

चीजों को जितनी बार बदलो, वह अपनी पुरानी शक्ल की ओर लौटने लगती है। भौतिक जिंदगी के दो सबसे बड़े सच-घर और शराब (जरूरत और शौक)- के लिए, आदि काल से व्यक्तिजन्य समाज अपने लिए उपलब्ध कराता रहा है। पहले होती थीं हवेलियां। सुनने में अच्छा लग रहा होगा। इसके भीतर का सच ये था कि उस हवेली के सभी बेटों के लिए एक कमरा नहीं होता था। सो जिसकी बीवी मायके रहती थी, उसे बाहर सोना पड़ता था। उसके हिस्से के घर में नया जोड़ा सोता था। सास इस बात का पूरा ख्याल रखती थीं कि हवेली में जितने कमरे उपलब्ध हैं, उतनी बहुएं ही हवेली में रहेंगी, बाकी किसी-न-किसी बहाने मायके भेज दी जाती थीं। यह था तब का फ्लैट मैनेजमेंट। दूसरे, आपने सुना होगा कि प्राचीन काल में यज्ञ में 'सोमÓ का हव्य हर देवता के हिस्से चढ़ाया जाता था। यह सोम और कुछ नहीं बल्कि तब के जमाने की तकनीक के हिसाब से बनी उत्कृष्टï किस्म की शराब थी जिसे इंद्रादि देवता ग्रहण कर जाते थे। इसमें इंद्र चोरी से दूसरे के हिस्से का सोम भी पी जाते थे। इसी से तुलसीदास कहते हैं 'मधवा (इंद्र) महामलिनÓ।उपर्युक्त भूमिका की जरूरत इसलिए पड़ी कि तब से आज तक गंगा में इतना पानी बहा कि वह सूखने को चली। ज्वाइंट फैमिली से न्यूक्लियर फैमिली बन गई। तब की हवेलियों की दीवारें घिसकर पहले घर, फिर फ्लैट और अब नैनो फ्लैट। यानी पहले एकड़ में बनने वाला घर अब ४५ गज के प्लॉट पर बनेगा। १० बाई १० या १० बाई ८ के आकार का यह फ्लैट सिर्फ आपको लेटने और सोने की आजादी देगा। आपका घर आपकी तरह सांस नहीं ले सकेगा। आप खुद सोचें कि इस मंदी की हालत में भी देश को लगभग ढाई करोड़ मकानों की जरूरत है जबकि उधर ब्रांडी, रम, व्हिस्की की बिक्री सालाना करोड़ों पेटियों में हो रही हैं। केवल मैक्डोवेल ब्रांडी की बिक्री पिछले साल ८० लाख पेटी हुई है। एक पेटी में १२ बोतल। या यूं कहें कि ९ लिटर शराब। नैनो फ्लैट जब आएगा जब आएगा तब देखा जाएगा मगर फिलहाल आप यह जानें कि शराब के शाहंशाह विजय माल्या की शराब कंपनी यूएसएल और उसकी सहायक कंपनियों ने मिलकर इस वित्तीय वर्ष में १.५ करोड़ पेटी शराब ज्यादा बेची। यानी लगभग १४ करोड़ लिटर ज्यादा शराब। आनेवाले पांच सालों में १० करोड़ नए वोटर (आप बेरोजगार समझें) होंगे यानी लगभग ५ करोड़ फ्लैट्स (मान लें कि स्त्री-पुरुष अनुपात बराबर है) और कम-से-कम १५ करोड़ लिटर शराब (मानें कि मंदी के असर के बावजूद एक परिवार में हस्बैंड-वाइफ के जन्म-दिन और शादी के दिन एक लिटर शराब की खपत होगी) की डिमांड होगी। इस कमजोर हिसाब-किताब के बावजूद शुरूआती तौर पर इतना तो पता है ही कि घर और शराब, जीवन रक्षक दवा की तरह हैं जिस पर नही चाहते हुए भी आपको खर्च करना पड़ेगा। माना कि आप नहीं पीते लेकिन शादी की सालगिरह पर अपने दोस्त को तो पिलाएंगे न। बात बराबर है!अब आइए देखते हैं कि शराब कंपनियों और घर-कंपनियों की गिद्घ नजर क्या कहती है इस बारे में। रीयल इस्टेट कंपनियां बड़ी तादाद में ऐसे फ्लैट तैयार करने में लगी हैं जो टाटा के नैनो फ्लैट की तर्ज पर कम मार्जिन पर घर बेचेंगी। क्योंकि मार्जिन भले ही कम हो लेकिन फ्लैट की तादाद ज्यादा हो तो मुनाफे पर उतना असर नहीं पड़ेगा। याद रखें 45-45 गज के मकान बनाकर अगर पांच-साढ़े पांच लाख में बेचे जाएं तो कंपनी के मुनाफे पर खास असर नहीं पड़ेगा। हां, 'छिपी बेरोजगारीÓ के शिकार रोजगार प्राप्त लोग इस नए स्लम में जरूर रह सकेंगे। और जहां तक मार्केट के्रडिबिलिटी का सवाल है तो यही एकमात्र फॉम्र्यूला है जिससे बड़े बिल्डरों और रियल्टी कंपनियों पर प्रॉपर्टी बाजार में बुलबुला बनाने का दाग भी मिट सकेगा और पूरे रियल्टी सेक्टर की विश्वसनीयता फिर से बहाल हो सकेगी। भारत में मकानों की मांग और आपूर्ति के बीच जो बड़ी खाई है वह सस्ते फ्लैटों से काफी हद तक भर जाएगी। दूसरी तरफ शराब के बादशाह विजय माल्या के वचन सुनें। वे कहते हैं कि ब्रांडों को नया रूप-रंग देने के लिए कंपनी ने रोमानोव रेड के नए ब्रांड नाम के साथ नया प्रेस्टिज वोदका, व्हाइट एंड मैक्के स्पेशल का रेग्युलर स्कॉच और छोटे पैकों में ब्लैक डॉग को बाजार में उतारा। हमने अपने एंटिक्विटी रेंज, रॉयल चैलेंज, मैकडॉवेल्स नंबर वन और ब्रांडी की पूरी रेंज को भी नया रूप दिया। मूल जोर छोटा पैक, फिक्स प्राइस और ज्यादा मुनाफा पर है। क्योंकि कोई भी मंदी ज्यादा-से-ज्यादा यही कर सकती है कि गाड़ी नहीं खरीदने देगी, लेकिन एक दिन के किराए पर गाड़ी का सुख तो देगी ही। और अगर इससे ईगो हर्ट हो तो नैनो पैक है न!

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