महानगरों में बहुत तरह की महिलाएं रहती हैं। मसलन सड़क पर झाड़ू लगाने वाली और घर में बर्तन साफ करने वाली से लेकर पेज थ्री पार्टी में सुर्ख लाल लिपस्टिक और उजले बालों वाली लेडीज तक। अच्छा, यहां की एक और खासियत होती है। पूछो क्या? उपर्युक्त वर्णित महिलाओं और लेडीज के घरों में आय के हिसाब से टीवी है, केबल लाइन भी है। यानी इस बात की पूरी छूट है कि लेडीज गुड टाइम्स पर शिल्पा शेट्टïी को योगा सिखाते देख गुस्से से जलें, फैशन शोज देखकर अपनी बॉडी शेप को आईना में देखें, जूम पर पेज थ्री पार्टी देख अपने किसी को फोन करके पूछें कि उन्हें क्यों नहीं बुलाया..., और झाड़ू लगानेवाली महिलाएं गिलास में चाय पीते हुए 'रसिक बलमाÓ वाला कोई फूहड़ गाना सुनकर स्त्री-आजादी के अलौकिक एहसास से भर जाएं।जिस घर में टीवी घुस गया है, उस घर की यह लाइफ स्टाइल हो गई है। लेकिन तब लाख टके का सवाल है कि टाइट फिटिंग की ड्रेस पर लो कट ब्लाउज (ये महिला-लेडीज दोनों का प्रिय फैशन है, क्योंकि यह उन्हें फ्री होने का एहसास कराती है) का फैशन जीनेवाली महिला/लेडीज के फैशन स्टेटमेंट में अभी तक वोट करना क्यों नहीं आ पाया है?ऐसे ये महिलाएं और लेडीज वोटिंग और सेक्स को लेकर एक राय रखती दिखती हैं। अपने ऑब्जर्वेशन में मैंने देखा है कि गांव से शहर और फिर महानगर तक जब तक ये लड़कियां और गल्र्स होती हैं, वोट और सेक्स को लेकर एक-सा एक्साइटमेंट रखती हैं। मसलन मम्मी/मां किचन में परेशानी का बहाना मार सकती हैं लेकिन ये (लड़कियां/गल्र्स) पापा का हाथ पकड़ वोट की लाइन में कुछ इस एहसास के साथ लगती हैं कि देखो, पुरुषो!, यहां भी मैं तुम्हारे साथ हूं। हालांकि इस बात से बहुतों को आपत्ति हो सकती है, लेकिन सिर्फ उन्हें तीनों जगहों की लड़कियों/महिलाओं या गल्र्स/लेडीज के जीवन को नजदीक से नहीं देखा है। ज्यों ही ये लड़कियां/गल्र्स, महिला/लेडीज में कन्वर्ट होती हैं, उनका इतना एक्सप्लोरेशन या कहें कि एक्सप्लायटेशन हो जाता है कि उनमें एक अजीब किस्म का ' दार्शनिक नकार भावÓ आ जाता है, जैसे दो-तीन बच्चे जनने के बाद या ४०-४५ की उम्र के बाद उनमें सेक्स के प्रति अजीब किस्म का नकार भाव आ जाता है। अब यहां नकार के भी दो अलग-अलग कारण हैं। महिलाएं समझने लग जाती हैं कि बच्चे हो गए सो अब सेक्स की क्या जरूरत?, जबकि कुछ किताबें पढ़ लेने के कारण लेडीज समझने लग जाती हैं कि बेवजह का 'घावÓ क्यों लिया जाए। बल्कि वे तो एक कदम आगे बढ़कर इस मुकाम पर पहुंचने के बाद, लेस्बियन/गेइज्म और एक्सट्रामैरिटल अफेयर्स के अंतहीन प्रवचनों में लीन हो जाती हैं।परिणाम यह कि जैसे सेक्स से विरक्ति, वैसे वोट से। अगर विधानसभा, लोकसभा चुनाव और उपचुनावों को जोड़ दिया जाए तो तकरीबन हर छह महीने में देश में चुनाव होते हैं, लेकिन चैनल, अखबार उसे महिलाओं-लेडीज तक पहुंचा ही देते हैं। यहां मीनोपॉज से ठंडी पड़ी लेडीज देखती है कि उसके ड्राइंग रूम में दो तरह की चर्चा हमेशा होती है- 'सेक्स और चुनावी राजनीतिÓ। सो उन्हें दोनों से खास किस्म की नफरत होने लगती है जो बाद में विरक्ति में बदल जाती है। घाघ राजनेता इस सच को बारीकी से पहचानते हैं इसलिए दिल्ली में जीत की हैट्रिक लगाने वाली महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद यहां इस बार भी महिला मुद्दा नहीं है। तो जब वह केंद्र में ही नहीं है तो वह जोश कहां से लाए, जो २० साल की उम्र में उनमें खुद-ब-खुद आ जाता था। अब तो उसने हर बात पे हारना सीख लिया है। महिला आरक्षण बिल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सिर के बाल नहीं नोंचते हुए आप ये समझें कि वोट नहीं करके, कहीं गहरे
इनके चोटिल अहं को मरहम मिलता है। शायद...
Monday, May 4, 2009
इन दिनों क्या कर रहे हैं सोप और रियलिटी शोज
टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए पिछले एक महीने से कुछ भी अच्छा नहीं घट रहा है। बालिका बहू जैसे सीरियलों ने कुछ उम्मीद दिखाई थी कि चुनाव सिर पर आ गया और आईपीएल तो पहले से था ही। यानी एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा। दोनों ने मिलकर धारावाहिकों और रीयल्टी शो की हवा गुम कर रखी है। लगता नहीं है कि इस महीने भी टेलीविजन धारावाहिकों को इससे निजात मिल पाएगी।हालांकि न्यूज चैनलों पर सोप के डाइरेक्टर इस बात से इंकार करते हैं कि आईपीएल उन्हें नुकसान करेंगे या कर रहे हैं। लेकिन उन्हें पता नहीं है शायद कि न्यूज चैनलों ने मैच के दौरान और बाद में अलग-अलग स्पोट्र्स शो शुरू कर दिए हैं और इतना तो सभी जानते हैं कि जो लोग मैच देखना पसंद नहीं करते वे मैच के नाम पर न्यूज चैनलों में हो रहे तमाशे को बहुत एंज्वाय करते हैं। सो आजकल टीआरपी की कोई बात नहीं कर रहा है। हालांकि सोप निर्माता केवल उस खबर से खुश होना चाहते हैं कि पिछले साल आईपीएल टूर्नामेंट के पहले मैच की टीआरपी थी ८.२१ जबकि इस बार पहले मैच को ५.५ टीआपी मिली। लेकिन यहां देखने लायक बात यह है कि पिछली बार पहला ही मैच सबसे हाई पिच पर खेला गया था, इस बार एक हफ्ते बाद हाई पिच गेम देखा गया। जैसे कोलकाता नाइट राइडर्स का सुपर ओवर में हारना, युवराज की पहली आईपीएल हैट्रिक और फिफ्टी के बावजूद पंजाब किंग्स इलेवन का हार जाना। सो आईपीएल और चुनावी फीवर हाई होता गया, सोप तथा रीयल्टी शो का फीवर डाउन होता गया। इससे बचने के लिए देखें कि किस स्तर पर क्या-क्या तैयारियां चल रही हैं।रीयल्टी शो ने शुरू किया फूहड़ भाषा का खेलथर्ड ग्रेड फिल्मों से प्रभावित ये रीयल्टी शो आज की तारीख में हद दर्जे की फूहड़ भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि कुछ दर्शक जुटाए जा सकें। उदाहरण के तौर पर सोनी पर आ रहे कॉमेडी सर्कस को लें। श्रुति इसकी एंकर हैं और पटना साहिब से बिहार बाबू को टक्कर दे रहे शेखर सुमन इससे जज। साथ में अजय जडेजा भी। इसके पिछले कार्यक्रम की थीम थी-'भूतÓ। अब देखें कि एक भूतनी कहती है- 'आज कल के भूत बड़े ठड़की हो गए हैं।Ó क्या परिवार के साथ बैठकर आप देखेंगे? शायद यह इनकी बदहवासी का नतीजा है।आईपीएल शो लाइव और फ्रीमोबाइल पर एक एसएमएस आया कि दिल्ली के वसंत कुंज स्थित डीएलएफ प्लेस के हब में आउटडोर स्क्रीन पर मैच का लाइव प्रसारण किया जा रहा है। यहां उत्तम भोजन के बढिय़ा प्रबंध के साथ स्टेडियम एक्सपीरिएंस का पूरा-पूरा ख्याल रखा गया है। लेकिन पास फ्री। सोचिए इन सोप्स का क्या हो रहा होगा।प्राइवेट खिलाडिय़ों की छोटे शहरों में पहुंचआईपीएल को टारगेट कर बिग टीवी जैसों ने टीयर टू और टीयर थ्री शहरों को टारगेट किया है। २५० रूपए प्रति महीने के ऑफर के साथ ये दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के अलावा ५०० शहरों में अपनी सेवा देनी शुरू कर दी है। अच्छा, मैच की मलाई काटने के लिए इन्होंने वहां के ग्राहकों को ऑन दि स्पॉट सेवा देनी शुरू की है ताकि मैच के दौरान ग्राहकों को किसी तरह की पेरशानी नहीं हो, वरना न्यूज शो और सोप्स पर स्विच
करने में उन्हें कितना समय लगेगा।पुरुष भारी पड़ रहे हैं स्त्रियों परसोप्स की टारगेट व्यूअर महिलाएं हैं। लेकिन आईपीएल और चुनावी बहसें देखने के लिए वे रात ८-११ बजे का टाइम प्रेफर करते हैं, ताकि चाय पीते हुए ऑफिस की थकान उतारी जा सके। इसलिए रात का समय तो बुक है। बचा दोपहर का रिपीट टाइम, तो इस समय तपती गर्मी ने ज्यादातर घरों से दोपहर को बिजली गायब कर दी है। इससे बचा-खुचा चांस भी खत्म। अब तो बच्चे भी मैच के दीवाने हैंपिछली बार की रिपोर्ट थी कि लगभग ४२ प्रतिशत लोगों ने आईपीएल के मैच देखे। यानी उतने फीसदी दर्शकों ने सोप्स नहीं देखे। इस बार इससे भी खतरनाक स्थिति यह है कि आजकल बच्चे शिन चान जैसे कार्टून कैरेक्टर की बहस छोड़कर गिलक्रिस्ट के छक्के और युवराज की हैट्रिक की चर्चा में शाम को खेलने भी निकल रहे घर से बाहर। तो समझें कि इस बार लगभग आधे लोग आईपीएल और बाकी चुनाव देखेंगे। आने वाले दिनों में टीआरपी की रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करेगी।
करने में उन्हें कितना समय लगेगा।पुरुष भारी पड़ रहे हैं स्त्रियों परसोप्स की टारगेट व्यूअर महिलाएं हैं। लेकिन आईपीएल और चुनावी बहसें देखने के लिए वे रात ८-११ बजे का टाइम प्रेफर करते हैं, ताकि चाय पीते हुए ऑफिस की थकान उतारी जा सके। इसलिए रात का समय तो बुक है। बचा दोपहर का रिपीट टाइम, तो इस समय तपती गर्मी ने ज्यादातर घरों से दोपहर को बिजली गायब कर दी है। इससे बचा-खुचा चांस भी खत्म। अब तो बच्चे भी मैच के दीवाने हैंपिछली बार की रिपोर्ट थी कि लगभग ४२ प्रतिशत लोगों ने आईपीएल के मैच देखे। यानी उतने फीसदी दर्शकों ने सोप्स नहीं देखे। इस बार इससे भी खतरनाक स्थिति यह है कि आजकल बच्चे शिन चान जैसे कार्टून कैरेक्टर की बहस छोड़कर गिलक्रिस्ट के छक्के और युवराज की हैट्रिक की चर्चा में शाम को खेलने भी निकल रहे घर से बाहर। तो समझें कि इस बार लगभग आधे लोग आईपीएल और बाकी चुनाव देखेंगे। आने वाले दिनों में टीआरपी की रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करेगी।
१० पैसे में १ ईमेल पढऩे को मिले तो...
तो साइबर कैफे की आमदनी बहुत घट जाएगी और क्या! लेकिन यह संभव कैसे होगा? बस एक अकाउंट खोलना होगा द्वशड्ढद्गद्ग.द्बठ्ठ पर। इसके बाद अगर आप रोजाना एक रूपए शुल्क खर्च करते हैं तो रोज अपना १० ईमेल पढ़ सकते हैं अपने मोबाइल पर। यानी ३० रूपए महीना चार्ज। लेकिन ७९ रूपए में महीने भर अनलिमिटेड ईमेल एक्सेस कर सकते हैं। यह राशि आप कैश, चेक या क्रेडिट/डेबिट कार्ड से पे कर सकते हैं, लेकिन पेमेंट में देरी होने पर मोबाइल की टॉक वैल्यू से एक भी पैसा नहीं कटेगा।यह सेवा किसी भी सेलफोन पर यहां तक कि बेसिक ब्लैक एंड व्हाइट मोबाइल पर भी उपलब्ध होगी क्योंकि इस सेवा के लिए किसी जीपीआरएस, वैप या हाई फाई कनेक्शन की जरूरत नहीं। तकनीक का असली कमाल ये है कि ईमेल मोबाइल पर एसएमएस की तर्ज पर दिखेगा और ४८० कैरेक्टर तक पढऩे की सुविधा देगा। यानी ऑनलाइन पत्र का मजमून आप आसानी से समझ सकेंगे। आइए, जानते हैं इसकी अन्य विशेषताएं।मोबीडॉटइन पर आईडी खोलेंमोबीडॉटइन पर अपना ईमेल एकाउंट खोलें। फिर अलग-अलग ईमेल अकाउंट पर अपना मोबी आईडी फॉरवर्ड करें। इसके बाद जब भी कोई ईमेल आपके मेल बॉक्स में आएगी, यह तुरंत ट्रांसफर हो जाएगी आपके मोबी अकाउंट में और वहां से मोबी इसे आपके सेल पर ट्रांसफर कर देगी। ईमेल बन जाएगी एसएमएसचूंकि इस सेवा के लिए जीपीआरएस, वैप या वाई फाई सुविधा की जरूरत नहीं होती सो ईमेल पढऩे का एक ही रास्ता बचता है और वह है आपका मैसेज बॉक्स। मोबी किसी भी ईमेल को एसएमएस की शक्ल में भेजती है मोबाइल पर। इससे अब किसी को यह शिकायत नहीं होगी कि यार नेट बहुत स्लो है, ईमेल नहीं खुल रही। यानी बैंडविथ या स्पैक्ट्रम स्पीड के झंझट से छुटकारा।ईमेल का जवाब भी दे सकते हैं आपमोबी आपको किसी भी मेल आईडी की तर्ज पर रीड, रीप्लाय, रीप्लाय ऑल और सेंड आदि की सुविधा देती है। साथ ही आप किसी डॉक्यूमेंट को अटैच करके भी भेज सकते हैं। डॉक्यूमेंट अटैच करने पर आपको अटैचमेंट नंबर या कोड मिलेगा। मेल करते समय आपको उस खास कोड का उल्लेख करें ताकि रिसीवर अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर उस कोड पर क्लिक करके आपके भेजे गए अटैचमेंट को खोल सके। ४८० कैरेक्टर्स तक मेल पढ़ सकते हैं आपहर मेल १६० कैरेक्टर्स के तीन पैकेट्स में आपको दिखेगा। यह सीमा इसलिए है कि कहीं एक ही मैसेज से पूरा मैसेज बॉक्स न भर जाए।स्पैम को रोकने का ऑप्शन है यहांज्यादा स्पैम मैसेज की भरमार नहीं हो जाए, इसके लिए मोबी अकाउंट खोलते समय मेन ईमेल अकाउंट में संदेहास्पद आईडी को या तो ब्लॉक कर दें या फिर ब्लैकलिस्ट करें। इसके बाद आप जरूरी ईमेल आईडी को व्हाइटलिस्ट में डाल दें। इससे मोबाइल के मैसेज बॉक्स में सिर्फ व्हाइट लिस्टेड ईमेल ही आएंगी।यूजर सबसे बड़ा राजा हैइसलिए इस सेवा में आप ज्यों ही स्टॉप का एसएमएस मोबी को भेजेंगे, मोबाइल पर मैसेज आना बंद हो जाएगा और जरूरत पडऩे पर स्टार्ट का एसएमएस मोबी को भेजने पर नई ईमेल के साथ पहले की पेंडिंग पड़ी सभी ईमेल्स देख सकेंगे।
सपनों का घर आया आपके मोबाइल परमोबाइल पर
नेट की सुविधा ने सारी गड़बड़ कर दी। पहले आप सपनों के घर की तलाश में एजेंटों के चक्कर लगाते थे, बाद में साइबर कैफे या फिर ऑफिस में बॉस की नजर चुराकर प्रॉपर्टी की अलग-अलग साइट सर्च करते थे। और बॉॅस से बचना है तो अपना लैैपटॉप रखिए। मतलब ढोने का झंझट अलग से और मंदी की मार तो है ही। सो घर की तलाश कर रहे लोगों के घर तक सीधे पहुंचने के लिए मोवीसोक और ९९ एकडड़ॉटकॉम दोनों मिलकर उनके मोबाइल तक पहुंच गए हैं। यानी ये कि अब होम सीकर्स बीवी के साथ आराम से बैठकर आपस में डिस्कस करते हुए मर्जी का घर ढूंढ़ सकते हैं।कैसे करेंगे इंस्टॉलइसके लिए आपको अपने मोबाइल से ५६३०० पर एसएमएस करना होगा-'९९Ó। यह ९९ एकडड़ॉटकॉम का शॉर्ट फॉर्म है। या फिर द्धह्लह्लश्च://द्वशड्ढद्बद्यद्ग.९९ड्डष्ह्म्द्गह्य.ष्शद्व के लिंक पर अपना मोबाइल नंबर फीड कर दें। लेकिन इसके लिए आपके मोबाइल में जीपीआरएस कनेक्शन की सुविधा होनी चाहिए। एक बार आपके जीपीआरएस कनेक्शन से ९९ एकडड़ॉटकॉम का लिंक जुड़ गया, फिर आप बड़े आराम से एप्लीकेशन डाउनलोड कर लें अपने मोबाइल पर। इंस्टालेशन के बाद आप कभी भी अपने मोबाइल के च््रश्चश्चद्यद्बष्ड्डह्लद्बशठ्ठह्यज् या च्द्व4 श2ठ्ठज् फोल्डर से एक्सेस कर सकते हैं।कैसे ढूंढेंगे घरमेन मीनू में जाने के बाद तीन ऑप्शंस मिलेंगे- सर्च, चेक और पोस्ट। आप अपनी जरूरत के हिसाब से ऑप्शन क्लिक करें और उसके अनुसार आगे बढ़ें। इसके बाद आप मोबाइल के स्क्रीन पर ही अपने बजट, च्वॉइश और शहर के अनुसार प्रॉपर्टी की डिटेल्स प्राप्त कर सकते हैं। अच्छा इसमें खरीदने या किराया दोनों की सुविधा है। इस सुविधा की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इस एप्लीकेशन के जरिए बिल्डर या ब्रोकर से संपर्क कर सकते हैं, लेकिन उस बिल्डर या ब्रोकर का अकाउंट इस साइट पर होना जरूरी है। आपकी डिमांड की प्रॉपर्टी इस साइट पर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी फिर इनकी है। मोबीटेक तकनीक और ९९ एकर्सडॉटकॉम की जुगलबंदीइस जुगलबंदी ने मोबाइल पर प्रोपर्टी सर्च करने के लिए 'वैपÓ एप्लीकेशन मुहैया कराया है। इससे मोबाइल पर बिल्डर्स, ब्रोकर्स और बायर्स तीनों की ऑनलाइन मीटिंग संभव है। इससे कामकाजी लोगों का समय और पैसे दोनों बचने की पूरी संभावना नजर आती है।
आम निवेशकों का ख्याल करती नई पेंशन योजना
मंदी के दौर में आम उपभोक्ता/कामगार के लिए शेयर मार्केट की गति समझ से परे है। ऐसे में एक मई से देश भर में चालू नई पेंशन योजना (एनपीएस) सुखद एहसास की तरह है। हालांकि नए सरकारी कर्मचारी इसका लाभ ले रहे थे लेकिन अब सभी सरकारी, गैर सरकारी कर्मचारी इसका फायदा उठा पाएंगे। कैसे यह सबकी मददगार है यह तीन स्तर पर निवेशक के पैसे की सुरक्षा करता है-ई क्लास, जी क्लास और क्लास सी। साधारण भाषा में कहें तो इक्विटी, सरकारी प्रतिभूतियां और निश्चित आय जैसे कि बैंकों की एफडी। ज्यादा जानकारी के लिए आप पीएफआरडीए.ओआरजी.इन पर संपर्क किया जा सकता है। ई क्लास- इसमें ज्यादा जोखिम पर ज्यादा मुनाफे की व्यवस्था है। लेकिन इसके लिए अपने पैसे को इंडेक्स फंड में निवेश करना होगा।जी क्लास- इस कैटेगिरी में केंद्र और राज्य सरकारों के बांड शामिल हैं। यानी इसके डूबने की आशंका तो कतई नहीं।सी क्लास- इनमें बैंकों की फिक्स डिपोजिट योजना के अलावा असेट मैनेजमेंट कंपनियों के फंड शामिल हैं। यानी कि इससे भी निश्चित ब्याज दर पर वापसी की पूरी उम्मीद है।निवेशक चाहें तो इन तीनों ऑप्शंस को नकार सकते हैं, इस स्थिति में उन्हें ऑटो च्वाइस ऑप्शन में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।हालांकि बीते वित्त वर्ष में इन तीनो फंडों का मिला-जुला सालाना रिटर्न रहा है १४.५ फीसदी। इस हिसाब से तो यह बहुत लाभकारी दिखता है लेकिन यह पीएफ की तरह तयशुदा रिटर्न वाली स्कीम नहीं है। क्योंकि इसका पैसा शेयर, सरकारी बॉण्ड और कॉरपोरेट बॉण्ड में अलग-अलग अनुपात में लगाया जाएगा। सरकार ने फंड मैनेज करने का काम 6 कंपनियों को सौंपा है। इसके अलावा पेंशन फंड एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी की एक्सरे नजर से भी उन्हें गुजरना होगा। इस स्कीम का फायदा कब होगा एनपीएस 58 साल की उम्र के बाद फायदा देगी। बीच में पैसा नहीं निकाला जा सकता। हालांकि यह तय करने का हक खुद निवेशक को होगा कि तीनों विकल्पों में से किसमें कितना पैसा लगे, लेकिन अगर निवेशक की संतुष्टिï है तो यह काम इस पेंशन योजना के फंड मैनेजर करेंगे। निवेशक के कुल निवेश का अधिकतम 50 फीसदी ही शेयर में लगाया जा सकता है। इससे निवेश के डूबने का खतरा नहीं रहता।द्वि स्तरीय व्यवस्था है इसमेंपहले स्तर में पेंशन योजना के अंतर्गत ५८ वर्ष की उम्र से पहले निवेशक अपना पैसा नहीं निकाल सकता, ेलेकिन दूसरे स्तर में बीच में भी निवेशक अकाउंट से पैसे निकाल सकता है। इसे छह महीने बाद लागू किया जाएगा।अकाउंट कैसे खुलेगा इस स्कीम का सारा हिसाब-किताब नेशनल सिक्युरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) रखेगा। सो खाता भी वहीं खोलना होगा और वह भी परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर के साथ। वहां अकाउंट खुलवाने के लिए 50 रुपये देने होंगे। जबकि सालाना शुल्क 350 रुपए है। हर ट्रांजेक्शन की फीस 10 रुपये होगी। निवेशकों की आसानी के लिए २२ बैंकों को प्वाइंट ऑफ प्रजेंस (पीओपी) बनाया गया है, जबकि टोटल रेगुलेटर हैं छह। ये पीओपी निवेशक के लिए केवल संपर्क केंद्र का काम करेेंगे और कुछ नहीं। उनकी ब्रांच में जाकर अकाउंट खुलवाया जा सकता है। लेकिन इसका चार्ज 20 रुपए है और ट्रांजेक्शन फीस भी दुगुना है यानी 20 रुपए।बाकी फंड की तुलना में इसकी स्थितिआम जनता के लिए सबसे ज्यादा विश्वसनीय और लाभकारी है म्युचुअल फंड। लेकिन इसमें कुल निवेश का लगभग सवा दो फीसदी एंट्री लोड और डेढ़ फीसदी का मैनेजमेंट चार्ज लगता है। इसके मुकाबले इस नई पेंशन योजना में यह फीस कुल मिलाकर 0.0009 फीसदी के करीब है। हालांकि इसका अकाउंट चार्ज ज्यादा है। लेकिन इसमें अगर ज्यादा पैसे निवेश किए जाएं तो निश्चित रूप से बहुत किफायती होगा।
इसके अलावा इस स्कीम में किसी भी स्टेज पर टैक्स छूट नहीं है। आशा कीजिए कि इस निवेश पर टैक्स छूट हो सरकार की तरफ से, वरना आम निवेशक इससे मुंह मोड़ सकते हैं।
इसके अलावा इस स्कीम में किसी भी स्टेज पर टैक्स छूट नहीं है। आशा कीजिए कि इस निवेश पर टैक्स छूट हो सरकार की तरफ से, वरना आम निवेशक इससे मुंह मोड़ सकते हैं।
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