Sunday, May 10, 2009
पप्पू क्यों, बीबी क्यों नहीं
चुनाव आयोग ने बिना शर्त माफी मांगी अपने पप्पू वाले विज्ञापन पर, लेकिन तब तक विज्ञापन अपना काम कर चुका था। हवाएं ऐसे ५२ प्रकार की होती हैं। अभी तक इनका काम था-खुशबू/बदबू घर-घर पहुंचाना, फिर फूल के परागकण को पूरी दुनिया में छींटना जिससे इनकी संतति बढ़ती रहे। इस बार इस पगली, अल्हड़, अलमस्त हवा ने दोनों में से कोई काम नहीं किया। उसने पप्पू को घर-घर पहुंचा दिया। कोई पप्पू १९ साल का था, कोई पप्पू ५० साल का। कोई पप्पू इंंंजीनियर था तो कोई डॉक्टर और कोई डांसर। कोई पप्पू अपनी बीवी का पति था तो कोई अपनी प्यारी पिंकी का पापा। हवा के आवारापन ने इन सबको गैर जिम्मेवार थाली का जिम्मेवार बैंगन बना दिया। आशय यह कि ये जिम्मेवारी से अपनी गैर जिम्मेवारी निभानेवाले कैरेक्टर हैं। सो यह खुशबू तो हर घर जानी थी!मगर पप्पू क्योंकैडबरी एड में पहली बार पप्पू को इंट्रोड्यूस करानेवाले एडमेकर ने कहा कि उन्हें लगा कि पप्पू हमारे बीच का कॉमन नेम है, सो डाल दिया। सोचने की बात है कि ये पप्पू नामक जीव कहां जनमता है। यह महानगरों के एसीनुमा हॉल में अंग्रेजी झाड़ता मिल सकता है, मगर इसका जन्म गांव और कस्बे के सिवा कहीं नहीं हो सकता। महानगर वाले टॉम, डिक, हैरी में यकीन करते हैं। बड़े और छोटे शहर में लोग मेखला और श्रंखला जैसे नाम बना लेते हैं। ऐसे अकेले एडमेकर की क्या बिसात कि पप्पू की यह गत बनाएं, वो तो खुद इन पप्पुओं के बीबी (बिग बी) ने इसे यह कहकर लॉक कर दिया कि पप्पू पास हो गया। मानो यह दुनिया का आठवां अजूबा हो। क्या आपको नहीं लगता कि यह बीबी बिग बी नहीं होकर बिग बेवकूफ था। क्योंकि इस बीबी यानी ब्रांड ब्रेकर को आभास भी नहीं होगा कि वह अपनी इस बनिया हरकत से पप्पू समाज को हिकारत का पात्र बना देगा। आप खुद देखें कि दूसरे बीबी यानी बुरे बदमाश ने एक पैरामीटर सेट कर दिया कि पप्पू कांट डांस साला। उसे लड़की चाहिए तो डांस करना सीखना पड़ेगा। आज आप देखो कि लड़की सिर्फ पैसे मांगती है जो कि उसके पप्पू के पास है! लेकिन हद तो कर दी नए बीबी ने यानी बड़े बदमाशों ने। इस श्रेणी में वे सारे हैं जिनकी रोजी-रोटी-बेटी का जरिया इंग्लिश है। इनका मानना है कि पप्पू गैर जिम्मेवार इंसान है। पप्पू की हालत पर एक शेर याद आता है 'जहां बेदर्द हाकिम हो, वहां फरियाद क्या करना।Ó पप्पू जहां-जहां अपने दर्द की शिकायत कर सकता है, सब जगह बीबी बैठे हैं। चुनाव आयोग से लेकर देश को चलानेवाले हर चौक-चौराहे पर। काम इनके पप्पू से भी बदतर हैं लेकिन ये तो बीबी हैं कोई पप्पू नहीं। बीबी को फर्क नहीं पड़तापप्पू की बीवी को चाहे रात में नींद नहीं आती हो, लेकिन बीबी के बाकी फुल फार्म (बिग बी, ब्रांड ब्रेकर, बुरे बदमाश, बड़े बदमाश आदि) चैन से मुफ्त की कैडबरी खाते हैं और पेप्सी का कुल्ला करते हैं, सफाई के नाम पर जंगल साफकर अपना फार्म हाउस बनवाते हैं, एसी गाड़ी से चलते हैं ताकि सीधा ग्रीन हाउस गैसें छोड़ सकें। क्योंकि ऐसी कोई हवा नहीं जो इस गैस को सीधे किसी बीबी के घर में पहुंचाए। लंका दहन के समय तीन हवाएं (शीतल, मंद, सुगंध) पूरी लंका में नहीं चल रही थीं, लेकिन इस ग्रीन हाउस गैस की आग की लपट में झुलसती दुनिया में ये तीनों हवाएं केवल इन बीबी के घर में बह रही हैं।
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